कृषि ज्ञान काला गेहूँ

 

किसानों के लिए खरे सोने जैसा है काला गेहूं, 4 गुना मुनाफा देने के साथ-साथ डायबिटीज में करता है फायदा!


इस गेहूं को कहते हैं,`किसानों का काला सोना`, फायदे इतने कि खरीदने को हो जाएंगे मजबूर


गेहूं के आटे की रोटी तो आप सबने खाई होगी लेकिन क्या आपने काले गेहूं की रोटी खाई है. आपको बता दें कि काले गेहूं का आटा किसी आम आटे की तुलना में ज्यादा फायदेमंद होता है.

दुनिया के कृषि विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी ने खूब तरक्की कर ली है. इन दिनों बाजारों में तरह-तरह की सब्जियां आ चुकी हैं. बैंगनी पत्ता गोभी, काले चावल और कई दूसरे तरह की हाईब्रिड सब्जियां जो शरीर को किसी आम सब्जी के मुकाबले ज्यादा फायदे देती हैं. आपने गेहूं की कई वरायटी देखी होगी लेकिन क्या कभी आपने काले गेहूं के बारे में सुना है? आपको बात दें कि काला गेहूं किसी आम गेहूं के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होता है. काले गेहूं में मौजूद एंथोसाएनिन पिगमेंट के कारण इसका रंग काला होता है. किसी आम गेहूं में एंथोसाएनिन की मात्रा 5 पीपीएम होती है जबकि काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम होता है. यह हार्ट की बीमारियों, कैंसर और डायबिटीज के खतरे को कम करता है. काले गेहूं में आम गेहूं के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा आयरन पाया जाता है.



नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (एनएबीआई) मोहाली द्वारा 7 साल की रिसर्च के बाद काले गेहूं का पेटेंट करा लिया जा चुका है. एनएबीआई द्वारा इस गेंहू का नाम ‘नाबी एमजी’ दिया है. आपको बता दें काले, नीले और जमुनी रंग वाले ये गेहूं आम गेहूं से कई गुना ज्यादा पौष्टिक है. ब्लैक व्हीट तनाव, मोटापा, कैंसर, डायबीटीज और दिल से जुडी बीमारियों की रोकथाम में मददगार साबित होगी. बता दें डॉ. मोनिका गर्ग के नेतृत्व में यह रिसर्च मोहाली में 2010 से की जा रही थी.आम गेहूं में जहां एंथोसाइनिन की मात्रा 5 से 15 पास प्रति मिलियन होती है, वहीँ ब्लैक व्हीट मे 40 से 140 पास प्रति मिलियन पायी जाती है. एंथोसाइनिन ब्लू बेरी जैसे फलों की तरह सेहत लाभ प्रदान करता है. यह शरीर से फ्री रेडिकल्स निकालकर हार्ट, कैंसर, डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों की रोकथाम करता है. इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक है.

नाबी की साइंटिस्ट डॉ. मोनिका गर्ग ने काले के साथ-साथ नीले और बैंगनी रंग के गेहूं की किस्मों को भी विकसित किया है |


अगर आप काले गेहूं की खेती (How to do Black Wheat Farming) करते हैं, तो आपको तगड़ा मुनाफा हो सकता है। इसकी फसल करीब 3-4 महीने में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है। एक एकड़ में काले गेहूं की खेती से आपको करीब 15 क्विंटल तक का उत्पादन मिलेगा। जहां सामान्य गेहूं 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक के हिसाब से बिकता है, वहीं काला गेहूं 7-8 हजार रुपये प्रति क्विंटल (profit in Black Wheat Farming) तक बिकता है। यानी सामान्य गेहूं की तुलना में 3-4 गुना मुनाफा।

भारत में गेहूं-धान-गन्ने की पारंपरिक खेती होती है। इसी वजह से सरकार ने इनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया हुआ है। हालांकि, इन खेतियों में मुनाफा (profit in Black Wheat Farming) काफी कम होता है, लेकिन अगर आप कुछ खास किस्मों की खेती (How to do Black Wheat Farming) करते हैं तो आपको तगड़ा मुनाफा होगा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं गेहूं की एक खास किस्म के बारे में, जिसकी खेती से आपको तगड़ा मुनाफा होगा। ये है काले गेहूं की खेती।



काले गेहूं में प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर, मैग्नीशियम, फास्फोरस जैसे पोषक तत्व काफी मात्रा में पाए जाते हैं, जिसके चलते यह स्वास्थ्य के लाभदायक होता है। काले गेहूं को पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बॉयोटेकनोलॉजी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। अपने खास गुणों के चलते इसकी मांग काफी अधिक रहती है। वहीं दूसरी ओर इसकी सप्लाई लिमिटेड होने के चलते इसकी कीमत काफी अधिक मिलती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए काला गेहूं बहुत ही फायदेमंद होता है। यह गेहूं कैंसर से बचाने में भी मदद करता है और त्वचा पर झुर्रियां भी जल्दी नहीं पड़ती हैं।


काला गेहूं की खेती (Black Wheat Farming) से सम्बंधित जानकारी

देश के किसानो की रुचि नए प्रयोग का इस्तेमाल कर खेती करने की और आकर्षित हो रहा है, जिसमे वह अलग-अलग तरह की फसलों का उत्पादन कर रहे है | किसान अब नई किस्म की सब्जी और फसलों की खेती में अधिक रुचि दिखा रहे है | इसमें जिस खेती की तरफ किसानो का सबसे ज्यादा झुकाव हुआ है, वह गेहू और काले धान की फसल है | क्योकि इससे किसानो की बेहतर कमाई हो जाती है | वर्तमान समय में भारत में गेहू की कई प्रजातियां मौजूद है | जिसमे से कुछ प्रजातियां अधिक उत्पादन और कुछ रोग प्रतिरोधक वाली है | किन्तु इनके बीज देखने में एक जैसे ही होते है, लेकिन काले गेहूं का बीज काला ही होता है | किसान भाइयो का रूझान भी सामान्य गेहूं के मुकाबले काले गेहूं की और अधिक बढ़ रहा है |

काले गेहू के फायदे (Black Wheat Benefits)

यदि किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी है, तो उसे काले गेहूं का सेवन करना चाहिए, क्योकि यह दिल में लगने वाले रोग के खतरे को कम करता है |

काले गेहूं में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य बनाए रखता है| इसमें ट्राइग्लिसराइड नमक तत्व भी मौजूद होता है |

यदि काले गेहूं का सेवन नियमित रूप से करते है, तो शरीर को उपयुक्त मात्रा में फाइबर मिल जाता है, जो पेट के रोगो के लिए काफी लाभकारी है, कब्ज रोग के लिए यह रामबाण इलाज है |

इसमें मौजूद उच्च मात्रा वाला फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है, जो पाचन संबंधी समस्याओ के साथ ही पेट के कैंसर से भी निजात दिलाता है |

यह शरीर में मौजूद उच्च कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है, और ब्लड प्रेसर को भी नियंत्रित करता है |

मधुमेह से पीड़ित लोगो के लिए काला गेहूं बहुत उपयोगी होता है, यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है |

आंतो में हुए इन्फेक्शन से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन काले गेहूं का सेवन किसी न किसी रूप में अवश्य करे | यह शरीर में फाइबर की मात्रा को बेहतर रूप से बनाए रखता है, और आंत के इन्फेक्शन को भी ठीक करता है |

काले गेहूं में अनेक पोषक तत्व मौजूद होते है, जिसमे से एक फास्फोरस भी होता है | यह शरीर में नए ऊतक का निर्माण और उनके रखरखाव में मददगार होता है, ताकि शरीर को सुचारु रूप से कार्य करने में दिक्कत न हो |

भ्रम में न रहें, सामान्य से ज्यादा पौष्टिक नहीं है काला गेहूं, जानिए किस शोध से मिली यह जानकारी

Black wheat काले गेहूं में ज्यादा पौष्टिकता के दावे से प्रभावित होकर तमाम किसान तीन से चार गुना अधिक कीमत पर इसका बीज खरीद रहे हैं। इससे किसानों की आय भी बढ़ाने की बात कही जा रही है।


पश्चिम उत्तर प्रदेश में काले गेहूं में अधिक पौष्टिकता का दावा किया जाता है। इंटरनेट मीडिया पर भी इसे खूब प्रचारित भी किया जा रहा है, जिसके चलते किसानों में इसके उत्पादन की होड़ लगी है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो काला गेहूं सिर्फ देखने में काला है, इसमें पौष्टिकता सामान्य गेहूं से अधिक नहीं है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक भी किसानों में फैले इस भ्रम को तोड़ने में लगे हैं

सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर डा. आरएस सेंगर के अनुसार, गेहूं अनुसंधान निदेशालय करनाल के वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि देश में काले गेहूं की कोई किस्म जारी नहीं हुई है। जिस काले गेहूं का उत्पादन किसान कर रहे हैं, वह पीली भूरी रोली के साथ कई बीमारियों का वाहक है। इसकी चपाती भी बेस्वाद रहती है। ऐसे में किसानों को इस प्रजाति के उत्पादन से बचना चाहिए। आगे चलकर इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।



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