टूट जाएगा अफ्रीका, 18 साल में पड़ी 56 किमी लंबी दरार, दुनिया को मिलेगा नया महाद्वीप

 टूट जाएगा अफ्रीका, 18 साल में पड़ी 56 किमी लंबी दरार, दुनिया को मिलेगा नया महाद्वीप


पूर्वी अफ़्रीकी दरार , उत्तर में अदन की खाड़ी से लेकर दक्षिण में ज़िम्बाब्वे तक फैली हुई, गहरी घाटियों, खड़ी ढलानों और ज्वालामुखीय चोटियों की एक जटिल प्रणाली है। यह महाद्वीपीय दरार की चल रही प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें पृथ्वी की पपड़ी धीरे-धीरे अलग हो जाती है।

अफ्रीका से जमीन का एक बड़ा टुकड़ा टूटकर अलग हो रहा है। यह दरार 56 किलोमीटर लंबी है। यह नया टुकड़ा अलग होकर नए महाद्वीप के रूप में जन्म लेगा।


वैज्ञानिकों के अनुसार महाद्वीप कई प्लेट्स पर तैर रहे हैं। ऐसा ही महाद्वीप है अफ्रीका। इस महाद्वीप में 18 साल की अवधि के दौरान 56 किलोमीटर लंबी दरार पड़ गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो हर साल जमीन का एक टुकड़ा करीब सवा 3 किलोमीटर की गति से टूट रहा है। जमीन का यह टुकड़ा अफ्रीका महाद्वीप से अलग होने वाला है। अलग होकर यह बड़ा टुकड़ा दुनिया के नए महाद्वीप के रूप में अस्तित्व में आएगा।


भूवैज्ञानिक और भूभौतिकीविद् अभी भी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि ऐसा होने का कारण क्या हो सकता है। वर्तमान अग्रणी सिद्धांत यह है कि पृथ्वी के मेंटल के भीतर गर्मी के गुबार केन्या और इथियोपिया के गुंबद और खिंचाव के नीचे लिथोस्फीयर (क्रस्ट और ठोस ऊपरी मेंटल) बना रहे हैं।https://cockysnailleather.com/g6qr2dkbx?key=99fed5e1bbbb0818506eb88f11b323be

वहीं इस दरार के बीच में एक नया सागर बनने वाला है। बड़ी बात यह है कि दरार हर साल बढ़ती जा रही है। इस दरार की लंबाई और चौड़ाई बढ़ती जा रही है। इसकी वजह तीन टेक्टॉनिक प्लेटों में अलग अलग यानी विपरीत दिशाओं में होने वाला खिंचाव है। ये तीनों प्लेट्स एकदूसरे से अलग दिशा में जा रही हैं।



वैज्ञानिकों के अनुसार इस समुद्र को बनने में 50 लाख से 1 करोड़ साल लग सकते हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से ये जल्दी भी हो सकता है। जहां दरार पड़ रही है, वह नूबियन, सोमाली और अरेबियन टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच मौजूद है। इसे अफार रीजन बुलाते हैं। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि अफ्रीका का यह हिस्सा अलग क्यों हो रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि पूर्वी अफ्रीका के नीचे मेंटल गर्म पत्थरों से ऊपर आ रहा है। बता दें कि मेंटल पृथ्वी के सबसे मध्य भाग 'कोर' के उपर की परत होती है।



वैज्ञानिकों की स्टडी का हॉटस्पॉट बनी ये दरार 



अफार रीजन में मची हलचल इस समय वैज्ञानिकों के लिए प्रयोगशाला बनी हुई है। दुनियाभर के साइंटिस्ट यहां आकर टेक्टोनिक प्लेटों के अलगाव की स्टडी कर रहे हैं। समंदर के बीच नई घाटी बनने से वहां पर समंदर का पानी चला जाएगा। जमीन के दो टुकड़े अलग-अलग दिशा में एकदूसरे से दूर हो जाएंगे।



अचानक अलग होने पर होगा भारी नुकसान 

अफ्रीका के हिस्से अलग होंगे इस प्राकृतिक प्रक्रिया से जानमाल का बहुत नुकसान होगा। असल में अफ्रीकन प्लेट टूट रही है। यानी अफ्रीका की जमीन दो अलग-अलग हिस्सों में बंट जाएगी। ये जगह है ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट। यह 56 किलोमीटर लंबी दरार है।

नए महाद्वीप पर होंगे ये देश



अफ्रीका महाद्वीप से टूटकर अलग होने वाली जमीन के बड़े टुकड़े से बने नए महाद्वीप में कई देश शामिल होंगे। इनमें युगांडा और जांबिया जैसे देश शामिल हैं। इन देशों के अपने समुद्री तट होंगे, जो पहले इनके पास नहीं थे। इससे अफ्रीका के बीच में एक नया सागर बनेगा। साथ ही इसमें केन्या, इथियोपिया, सोमालिया और तंजानिया के हिस्से शामिल होंगे।



 

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