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जुलाई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जीवनयापन के लिए सबसे महंगा देश है बरमूडा, भारत और अमेरिका का क्या है हाल? युद्धग्रस्त रूस को मिला 110वां स्थान

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  जीवनयापन के लिए सबसे महंगा देश है बरमूडा, भारत और अमेरिका का क्या है हाल? युद्धग्रस्त रूस को मिला 110वां स्थान बरमूडा रहने योग्य सबसे महंगा देश है। हालांकि वर्ल्ड ऑफ स्टैटिक्स द्वारा जारी की गई सूची के मुताबिक टॉप 10 देशों में भारत का नाम शामिल नहीं है। वर्ल्ड ऑफ स्टैटिक्स ने 140 देशों का आंकड़ा जारी किया है जिसमें पाकिस्तान को सबसे निचला पायदान हासिल हुआ है। भारत की बात की जाए तो उसे 138वां स्थान प्राप्त हुआ है। दुनियाभर में रहने के लिहाज से बरमूडा और स्विट्जरलैंड सबसे ज्यादा शानदार देशों में शुमार हैं, लेकिन यहां पर रहना हद से भी ज्यादा महंगा है। यह डेटा वर्ल्ड ऑफ स्टैटिक्स ने जारी किया है। वर्ल्ड ऑफ स्टैटिक्स ने 140 देशों की सूची जारी की है। जिसमें शीर्ष पर बरमूडा तो निचले पायदान पर पाकिस्तान मौजूद है। बता दें कि बरमूडा में मौजूद समुद्री बीच लोगों को काफी लुभाते हैं, लेकिन यहां कॉस्ट ऑफ लिविंग हद से ज्यादा महंगा है, जबकि स्विट्जरलैंड को इस लिस्ट में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इस सूची में केमैन आइलैंड्स, बहामास, आइसलैंड, सिंगापुर, बारबाडोस, नॉर्वे, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया का भी ...

ये हैं दुनिया के 5 सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन, लिस्ट में शामिल है भारत का ये ऐतिहासिक स्टेशन

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  ये हैं दुनिया के 5 सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन, लिस्ट में शामिल है भारत का ये         ऐतिहासिक स्टेशन ग्रांड सेंट्रल टर्मिनल, न्यूयॉर्क में एक प्रसिद्ध लैंडमार्क और परिवहन केंद्र है. यह 2 फरवरी 1913 को खुला था और विश्व के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में से एक है. इसकी 44 प्लेटफॉर्मों की संख्या के कारण यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का गर्व है. इसकी सुंदर आर्ट और वास्तुकला के कारण यह कई हॉलीवुड फिल्मों में भी दिखाया गया है. इसकी छत और मध्य भाग में स्थित चारों ओर साइडेड मोनयूमेंटल क्लॉक इसे खास बनाते हैं. कुआलालंपुर स्टेशन कुआलालंपुर शहर की एक ऐतिहासिक इमारत है, जो आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह वर्ष 1910 में मलेशिया की रेल परिवहन प्रणाली के केंद्र के रूप में निर्मित हुआ था और मूरिश आर्किटेक्चर के डिज़ाइन में बनाया गया है. इसकी विशालता और कांच और लोहे के गुंबदों की वजह से यह विक्टोरियन इमारत की तरह दिखता है. सेंट पैनक्रास इंटरनेशनल स्टेशन लंदन के प्रमुख स्थलों में से एक है और यूरोप के गेटवे के रूप में कार्य करता है. इसे मूल रूप से 1868 में...

आज भारत में सिनेमा के 127 साल पूरे

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  आज भारत में सिनेमा के 127 साल पूरे चलती ट्रेन देख थिएटर से भागे लोग, औरतें बेहोश हुईं: एक तोला सोने की कीमत में बिके टिकट जगह- मुंबई का वॉटसन होटल शाम के करीब 6 बजे शहर के 200 नामी रईस लोग होटल के ऑडिटोरियम में जमा हुए। यहां एक चमत्कार दिखाया जाना था। ऑडिटोरियम के एक तरफ सफेद पर्दा लगा था, उसके सामने कुर्सियों पर सभी लोगों को बैठाया गया, वैसे ही जैसे आज थिएटर में होता है। कुछ अंग्रेज यहां वो चीज दिखाने वाले थे, जिसे सिनेमा कहा जा रहा था। दावा था कि पर्दे पर लोग और जानवर चलते-फिरते दिखेंगे। इस चमत्कार को देखने के लिए इन 200 लोगों ने 1 रुपया कीमत चुका कर टिकट खरीदे थे। 1896 के उस दौर में सोना 1 रुपए तोला ही था। खैर, ऑडिटोरियम में अंधेरा किया गया और सिनेमा शुरू हुआ। जो दावा किया जा रहा था, वो सच निकला। सामने लगे सफेद पर्दे पर कुछ लोग एक फैक्ट्री से निकल रहे थे, इस फिल्म का नाम था 'वर्कर्स लीविंग द लूमियर फैक्ट्री'। ये वाकई चमत्कार था। लोग आंखें गढ़ाए पर्दे की तरफ एकटक देख रहे थे। ऐसा कैसे संभव है। कपड़े के पर्दे पर लोग चलते हुए कैसे दिख सकते हैं। सबके चेहरे पर ये सवाल दिख रहा...

एससीओ सम्‍मेलन में पुतिन ने दिल खोलकर की भारत की तारीफ, कहा- दुनिया ने छेड़ा हमारे खिलाफ हाइब्रिड वॉर

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  एससीओ सम्‍मेलन में पुतिन ने दिल खोलकर की भारत की तारीफ, कहा- दुनिया ने छेड़ा हमारे खिलाफ हाइब्रिड वॉर डॉलर, कोल्‍ड वॉर... एससीओ सम्‍मेलन में पीएम मोदी और पुतिन के सामने अमेरिका पर जमकर बरसे चीनी राष्‍ट्रपति जिनपिंग शंघाई को- ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्‍मेलन का वर्चुअल आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से किया गया है। मंगलवार को इस सम्‍मेलन में रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने हिस्‍सा लिया। इस दौरान जिनपिंग ने शांति के लिए जरूरी लक्ष्‍यों को हासिल करने की बात कही। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से वर्चुअली शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्‍मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने भी शिरकत की। वैगनर विद्रोह के बाद पहला मौका था जब पुतिन दुनिया के सामने आए हैं। इस मंच से उन्‍होंने दुनिया को भी एक संदेश दिया है। बीजिंग:  मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के सम्‍मेलन का आयोजन हुआ। यह सम्‍मेलन वर्चुअली आयोजित हो रहा है औ...

क्या होता है Interstellar? क्यों पूरी दुनिया के वैज्ञानिक खोज रहे हैं अंतरिक्ष की इस रहस्यमयी चीज को

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  क्या होता है Interstellar? क्यों पूरी दुनिया के वैज्ञानिक खोज रहे हैं अंतरिक्ष की इस रहस्यमयी चीज को धरती पर क्यों बार-बार आता रहता है अंतरिक्ष से ये खतरा, कितनी प्रभावित होती है हमारी दुनिया अब तक पृथ्वी पर दो इंटरस्टेलर मिल चुके हैं. इनमें से पहला साल 2017 में मिला था, जिसका नाम ओउमुआमुआ था. वहीं दूसरा इंटरस्टेलर साल 2019 में मिला था जिसका नाम बोरिसोव था. इंटरस्टेलर (Interstellar) उस चीज को कहते हैं जो अंतरीक्ष से धरती पर गिरी हो. ये उल्कापिंड से अलग होती है. हाल ही में हुए एक रिसर्च में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि उन्हें इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट की खोज करते समय कुछ ऐसी चीजें मिली हैं जिन्होंने सबको हैरान कर दिया है. दरअसल, ये खोज हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवी लोएब कर रहे हैं. उन्होंने दो सप्ताह पहले ही एक ऐसे ही पिंड की खोज करते हुए प्रशांत महासागर की गहराई में एक ट्रेजिंग परियाजना शुरू की है. क्या इससे पहले कभी पृथ्वी पर मिले हैं इंटरस्टेलर   इंटरनेट पर मिली जानकारी के अनुसार, अब तक पृथ्वी पर दो इंटरस्टेलर मिल चुके हैं. इनमें से पहला सा...

पश्चिम एशिया भारत की शक्ति को गंभीरता से लेने का समय आ गया है": अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी’

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  पश्चिम एशिया भारत की शक्ति को गंभीरता से लेने का समय आ गया है": अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी’ प्रधानमंत्री मोदी की हालिया मिस्र यात्रा का उल्लेख करते हुए लेख में कहा गया कि यह दौरा दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को दर्शाता है क्योंकि इससे पहले मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने लगभग छह महीने पहले भारत की यात्रा की थी. प्रमुख अमेरिकी पत्रिका ‘फॉरेन पॉलिसी' ने अपने हालिया लेख में पश्चिम एशिया में भारत के ‘‘अहम शक्ति'' के रूप में उभरने पर प्रकाश डाला है. इसे पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे दिलचस्प भू-राजनीतिक घटनाक्रम में से एक के रूप में देखा जा रहा है. लेख में इजराइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ नयी दिल्ली के गहरे और बढ़ते संबंधों पर प्रकाश डाला गया है. इसमें कहा गया है कि ये देश बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भारत के उभार का लाभ उठाने के इच्छुक नजर आ रहे हैं. लेखक स्टीवन ए. कुक ने अपने लेख में तर्क दिया कि इस बात की बेहद कम संभावना है कि अमेरिका इस घटनाक्रम में हस्तक्षेप कर सकता है. लेख में कहा...