तानाशाही हुकूमत

 


               तानाशाही की अवधारणा और सत्ता में बने रहने के लिए बल का प्रयोग और राजनीतिक विरोधियों का व्यवस्थित तरीके से उत्पीड़न, प्राचीन रोमन सभ्यता से ही चले आ रहे हैं। लेकिन, आधुनिक इतिहास के तानाशाहों ने इसे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और क्रूरता का पर्याय बना दिया। वहीं, मानव इतिहास के कुछ सबसे अधिक क्रूर तानाशाहों को सत्ता संभाले बहुत अधिक समय नहीं हुआ है।

                01.  बेनितो मुसोलिनी तानाशाह




बेनितो मुसोलिनी इटली के सबसे विवादास्पद तानाशाहों में से एक थे। उन्होंने इटली में फासिस्ट संगठन की स्थापना की थी और 1922 में उन्हें प्रधानमंत्री बनाया गया था। बेनिटो मुसोलिनी 1922 से 1943 में अपने पतन तक इटली के तानाशाह थे। वह 20वीं शताब्दी के सबसे प्रमुख व्यक्तियों में से एक थे और उन्होंने यूरोप में फासीवाद के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनके शासनकाल को क्रूर दमन, राजनीतिक शुद्धिकरण और विनाशकारी विदेश नीति से प्रभावित किया गया था, जो अंततः उनके पतन का कारण बना। 28 अप्रैल, 1945 को, मुसोलिनी को स्विटजरलैंड भागने का प्रयास करते समय पक्षपातियों द्वारा पकड़ लिया गया और मार डाला गया।

 
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मुसोलिनी का जन्म इटली के डोविया डी प्रेडापियो शहर में हुआ था
मुसोलिनी का जन्म 1883 में इटली के डोविया डी प्रेडापियो शहर में हुआ था। वह अपनी युवावस्था में एक सक्रिय समाजवादी थे और 1919 में फासिस्ट पार्टी की स्थापना करने से पहले एक पत्रकार के रूप में काम करते थे। मुसोलिनी की सत्ता में वृद्धि आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से हुई थी। 1922 में, मुसोलिनी को राजा विक्टर इमैनुएल III द्वारा प्रधान मंत्री नियुक्त किया गया, और उनकी फासीवादी पार्टी ने धीरे-धीरे अगले वर्षों में सत्ता को मजबूत किया, एक-दलीय राज्य की स्थापना की।
मुसोलिनी के शासन में असंतोष और राजनीतिक विरोध के क्रूर दमन की विशेषता थी। उन्होंने फासीवादी पार्टी के हाथों में सत्ता को केंद्रीकृत किया, मुक्त भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया और अपने चारों ओर व्यक्तित्व का एक पंथ बनाया। मुसोलिनी की विदेश नीति समान रूप से विनाशकारी थी, जिसके कारण नाजी जर्मनी के सहयोगी के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध में इटली का विनाशकारी प्रवेश हुआ।
1943 तक सत्ता पर मुसोलिनी की पकड़ कमजोर होती जा रही थी। मित्र देशों की सेना सिसिली में उतर चुकी थी, और इतालवी सेना को सभी मोर्चों पर हार का सामना करना पड़ रहा था। फासिस्ट ग्रैंड काउंसिल ने 25 जुलाई, 1943 को मुसोलिनी को सत्ता से हटा दिया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
मुसोलिनी का बचाव
मुसोलिनी के पतन के बावजूद, वह फासीवादी विचारधारा का प्रतीक बना रहा और कई लोगों ने उसे नायक के रूप में देखा। सितंबर 1943 में, ओटो स्कोर्जनी के नेतृत्व में एक जर्मन कमांडो यूनिट ने मुसोलिनी को ग्रैन सासो पर्वत श्रृंखला में उसकी जेल से बचाया। स्कोर्जनी का साहसी मिशन नाजियों और इतालवी फासिस्टों दोनों के लिए एक प्रचार तख्तापलट था, जिन्होंने मुसोलिनी और फासीवादी कारण के समर्थन में बचाव का इस्तेमाल किया।
उनके बचाव के बाद, मुसोलिनी को उत्तरी इटली में एक कठपुतली राज्य के नेता के रूप में स्थापित किया गया, जिसे इतालवी सामाजिक गणराज्य के रूप में जाना जाता है। हालांकि, नया शासन कमजोर था और जर्मन सैन्य समर्थन पर निर्भर था, और मुसोलिनी का अधिकार सीमित था।

मुसोलिनी का पतन
अप्रैल 1945 तक,
युद्ध समाप्त हो रहा था, और जर्मन सेना सभी मोर्चों पर पीछे हट रही थी। 25 अप्रैल को, मित्र देशों की सेना के समर्थन से इतालवी पक्षपातियों ने मिलान और उत्तरी इटली के अन्य प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया। इतालवी प्रतिरोध आंदोलन कम्युनिस्टों, समाजवादियों, उदारवादियों और राजशाहीवादियों सहित समूहों की एक विस्तृत श्रृंखला से बना था, जो फासीवाद और विदेशी कब्जे के विरोध में एकजुट थे।

मुसोलिनी की हत्या
इटली के तानाशाह बेनितो मुसोलिनी की हत्या दुनिया भर में विवाद का विषय रही है। मुसोलिनी और उसकी मालकिन क्लारा पेटाची ने इटली से भागने और स्विट्जरलैंड में शरण लेने का प्रयास किया। हालांकि, उन्हें 27 अप्रैल, 1945 को डोंगो गाँव के पास, कोमो झील पर पक्षपातियों द्वारा रोक दिया गया था। मुसोलिनी एक जर्मन सैनिक की वर्दी पहने हुए था, लेकिन उसकी पहचान का पता चल गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया

                        02. निकोलस चाचेस्कू

फिल्मी सितारों की तरह स्मार्ट दिखने वाले चाचेस्कू की सनक इस हद तक बढ़ गई थी कि उसने रोमानिया को विश्व शक्ति बनाने के लिए जनसंख्या बढ़ाने का रास्ता अपनाया। उसने इसके लिए रोमानिया में 'एबॉर्शन' यानी गर्भपात पर ही प्रतिबंध लगा दिया था। इससे महिलाओं की स्वतंत्रता पर बड़ा आघात हुआ। आज दुनिया में जब भी कहीं एबॉर्शन पर प्रतिबंध से समाज को होने वाले नुकसान की बात की जाती है, तब रोमानिया के इस ख़तरनाक फैसले का उदाहरण दिया जाता हैं।



कहा जाता है कि एबॉर्शन पर रोक के बावजूद अगर कोई महिला अवैध रूप से गर्भपात कराती और कोई दिक्कत हो जाती, तो अस्पताल में अक्सर इलाज के बजाय उसे ऑपरेशन टेबल पर मरने के लिए छोड़ दिया जाता। जिन महिलाओं का छुपकर गर्भपात कराया जाता और जो भी व्यक्ति इसमें मदद करता, उन्हें जेल में ठूंस दिया जाता था। उस दौरान बहुत सारी महिलाओं की मौत हो गई। गर्भपात नीतियों ने रोमानिया में मातृ मृत्यु दर को ख़तरनाक स्तर तक बढ़ा दिया। चाचेस्कू के शासन काल को रोमानिया में महिलाओं के लिए सबसे अधिक दमनकारी काल माना जाता है। इस दौरान पूरे रोमानिया में तलाक लेना भी बहुत मुश्किल बना दिया गया था, जिससे समाज में वैवाहिक रिश्तों में अपराध भी बढ़ने लगे थे।

फिल्मी सितारों की तरह स्मार्ट दिखने वाले चाचेस्कू की सनक इस हद तक बढ़ गई थी कि उसने रोमानिया को विश्व शक्ति बनाने के लिए जनसंख्या बढ़ाने का रास्ता अपनाया। उसने इसके लिए रोमानिया में 'एबॉर्शन' यानी गर्भपात पर ही प्रतिबंध लगा दिया था। इससे महिलाओं की स्वतंत्रता पर बड़ा आघात हुआ। आज दुनिया में जब भी कहीं एबॉर्शन पर प्रतिबंध से समाज को होने वाले नुकसान की बात की जाती है, तब रोमानिया के इस ख़तरनाक फैसले का उदाहरण दिया जाता है।
कहा जाता है कि एबॉर्शन पर रोक के बावजूद अगर कोई महिला अवैध रूप से गर्भपात कराती और कोई दिक्कत हो जाती, तो अस्पताल में अक्सर इलाज के बजाय उसे ऑपरेशन टेबल पर मरने के लिए छोड़ दिया जाता। जिन महिलाओं का छुपकर गर्भपात कराया जाता और जो भी व्यक्ति इसमें मदद करता, उन्हें जेल में ठूंस दिया जाता था। उस दौरान बहुत सारी महिलाओं की मौत हो गई। गर्भपात नीतियों ने रोमानिया में मातृ मृत्यु दर को ख़तरनाक स्तर तक बढ़ा दिया। चाचेस्कू के शासन काल को रोमानिया में महिलाओं के लिए सबसे अधिक दमनकारी काल माना जाता है। इस दौरान पूरे रोमानिया में तलाक लेना भी बहुत मुश्किल बना दिया गया था, जिससे समाज में वैवाहिक रिश्तों में अपराध भी बढ़ने लगे थे।


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चाचेस्कू के सनक भरे फैसले से रोमानिया में भुखमरी चरम पर पहुंच गई थी, लेकिन खुफिया पुलिस 'सेक्योरिटेट' को जनता की निगरानी के काम पर लगाए रखा गया था। तानाशाह को यह जानने की हद तक सनक थी कि लोग अपनी निजी ज़िंदगी में क्या करने लगे हैं। चाचेस्कू इतना कुंठित हो गया था कि हर समय खुफिया पुलिस से यही पता लगाता रहता कि कौन किससे मिलता है या कौन क्या बातें करता है। किसी पार्क में या घर की खिड़की के सामने चाचेस्कू का खुफिया एजेंट अख़बार में एक छेद करके बैठा रहता, ताकि लोगों की गतिविधियों को चुपके-चुपके देख सके।

चाचेस्कू इस बात से बेहद खौफ में रहता था कि उसकी सनक जनता के सामने ना आ जाए, इसलिए उसने अपनी ताकत के बल पर लगातार 25 बरसों तक रोमानिया की मीडिया को चुप किए रखा। सेंसरशिप ने मीडिया की स्वतंत्रता ख़त्म कर दी थी।

साथ ही, रोमानिया में कई विदेशी फिल्मों, संगीत और किताबों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। तानाशाह ने अपने कठोर फैसलों से वहां के लोगों में इतनी दहशत भर दी थी कि लोग अपनी परछाई से भी डरने लगे थे। लोगों को लगता था कि हमेशा उनका पीछा करवाया जा रहा है। इस भय का इतना प्रभाव पड़ा कि मुड़-मुड़कर पीछे देखने की लोगों की आदत बन गई। कहा जाता है कि तानाशाह की सत्ता समाप्त होने के 10 साल बाद तक भी लोग उसकी चर्चा करने से डरते थे।

                   03. एडोल्फ हिटलर


जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर को 1930 के दशक में सत्ता मिली थी और वह मानव इतिहास में सबसे बड़ी क्रूरताओं के लिए जिम्मेदार था। हिटलर की विदेश नीतियों के चलते द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी, जिसमें पांच से सात करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इसके साथ ही उसने लगभग 1.1 करोड़ लोगों की नस्लीय आधार पर व्यवस्थित हत्या का आदेश दिया, जिनमें से 60 लाख लोग यहूदी थे। उसने दूसरे विश्व युद्ध में हार के बाद सोवियत रेड आर्मी की गिरफ्त में आने से बचने के लिए 30 अप्रैल 1945 को आत्महत्या कर ली थी।

                     04. जोसेफ स्टालिन


जॉर्जिया में जन्मा सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन साल 1924 में लेनिन की मौत के बाद सत्ता में आया था। संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन का भविष्य का सहयोगी स्टालिन एक सनकी व्यक्ति था। उसने अपने राजनीतिक शत्रुओं के साथ साथ संदिग्ध विपक्षियों को भी क्रूरता से दबा दिया।  माना जाता है कि स्टालिन के शासन काल में करीब 1.4 से दो करोड़ लोगों की मौत दंड श्रम शिविरों में या 1930 के दशक में हुए ग्रेट पर्ज के दौरान हुई थी। इस दौरान लाखों लोग निर्वासित कर दिए गए थे। साल 1936 में 13 रूसी नेताओं पर स्टालिन को मारने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया था और उन्हें मृत्युदंड दिया गया था।
 

                   05. पॉल पॉट


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 खमेर रूज का नेता और 1975 से 1979 तक कंबोडिया का तानाशाह रहा पॉल पॉट आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर नरसंहारों में से एक के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था। चार साल तक कंबोडिया की सत्ता संभालने के दौरान करीब 10 लाख लोगों की मौत भुखमरी, जेल में, जबरन श्रम और हत्याओं की वजह से हो गई थी। उसे 1979 में वियतनाम ने सत्ता से बाहर कर दिया था लेकिन अपने लाल खमेर समर्थकों के साथ उसने थाईलैंड के ग्रामीण इलाकों में काम करना जारी रखा।

                    06. ईडी अमीन


युगांडा का तीसरा राष्ट्रपति ईदि अमीन करीब ढाई लाख लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार था। उसके शासन के आतंक के परिणामस्वरूप इतने लोगों की मौत हुई। उसके शासनकाल में प्रताड़ना, मृत्यु दंड, भ्रष्टाचार और जातीय उत्पीड़न चरम पर पहुंच गया था। वह 1972 से 1979 तक सत्ता में रहा, फिर तंजानिया के खिलाफ हार के बाद देश छोड़कर भाग गया था, जिस पर एक साल पहले उसने हमला किया था। वह लीबिया में और फिर सऊदी अरब में रहा। साल 2003 में उसकी मौत हो गई थी।

                07. आगस्तो पिनोशे


सैन्य तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे चिली में 1973 में हुए तख्तापलट के बाद सत्ता में आया था। पिनोशे करीब 20 साल तक सत्ता में रहा और इस दौरान उसने अपने विरोधियों का बेरहमी से दमन किया। उसके शासनकाल के पहले तीन साल में ही करीब एक लाख लोग गिरफ्तार किए गए थे। 1990 में पिनोशे के राष्ट्रपति बने रहने पर हुए एक जनमत संग्रह में चिली की जनता ने उसके खिलाफ वोट किया, जिसके चलते उसने राष्ट्रपति पद छोड़ दिया। साल 2000 की शुरुआत में उसे खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए ट्रायल का सामना करना पड़ा था, लेकिन अदालत ने कहा था कि वह ट्रायल के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है।

                   08. फ्रैंकोइस डुवेलियर


हेती के तानाशाह फ्रैंकॉइस डुवेलियर ने अमेरिका के सबसे गरीब देश की सत्ता 1957 से अपने निधन (1971) तक संभाली। अनुमान लगाया जाता है कि उसके शासन के दौरान हेती में करीब 30 हजार लोगों की हत्या कर दी गई थी। वहीं, हजारों लोगों को देश छोड़ना पड़ा था। पापा डॉक के नाम से मशहूर रहे डुवेलियर को कई लोग हेती की वर्तमान दशा के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। फ्रैंकॉइस के बाद उसके बेटे जॉन-क्लॉड डुवेलियर ने सत्ता संभाली, जिसका आतंक 1986 तक चला, जिसके बाद वह खुद निर्वासन में चला गया था। 

                       09. फ्रांसिस्को फ्रैंको


स्पेन का तानाशाह फ्रांसिस्को फ्रैंको सिविल वॉर में जीत के बाद 1939 से लेकर 1975 में अपने निधन तक सत्ता में रहा। उसके शासनकाल में बड़े स्तर पर असंतुष्टों का गंभीर और व्यवस्थित दमन हुआ। उन्हें या तो कन्संट्रेशन शिविरों में भेज दिया जाता था या जेल में बंद कर दिया जाता था। इसमें उनसे या तो जबरन श्रम कराया जाता था या मृत्यु दंड दे दिया जाता था। 1960 और 1970 के दशक में फ्रैंको का शासन कुछ उदार हुआ लेकिन स्पेन एक लोकतांत्रिक देश उसकी मौत के बाद ही बन पाया।

                        10. सद्दाम हुसैन


इराक का तानाशाह सद्दाम हुसैन 1979 में सत्ता में आया था। उसे करीब पांच से 10 लाख तक लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इनमें कुर्द समुदाय के लोगों की संख्या करीब 70 हजार से तीन लाख तक मानी जाती है। 2003 में अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम की अगुवाई में बने गठबंधन के दखल के बाद सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल कर गिया गया था। साल 2006 में उसे 1980 की शुरुआत के 148 शिया मुसलमानों की मौत के मामले में दोषी करार दिया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी। उसे 30 दिसंबर 2006 को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था।

                     11. चार्ल्स टेलर



लायबेरिया का पूर्व राष्ट्रपति चार्ल्स टेलर 1997 में इस पद के लिए चुना गया था। कथित तौर पर उसने यह पद देश की आबादी को डराकर हासिल किया था। वह मानवाधिकारों के घृणित उल्लंघन, युद्ध अपराध और पड़ोसी सिएरा लिओन में सिविल वॉर में मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़ा रहा। इसके अलावा दूसरे लिबेरियाई सिविल वॉर में भी उसने कई अपराधों को अंजाम दिया था। यह सिविल वॉर 1999 से 2003 तक चला था। उसके खिलाफ सिएरा लियोन सिविल वॉर में संलिप्तता के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ट्रायल चला था और 50 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।


                 12. मेंजिस्तू हेल मरियम

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इथियोपिया के तानाशाह मेंजित्सू हेल मरियम ने राजशाही को उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाई थी। वह 1974 में एक कम्युनिस्ट सैन्य जुंटा के साथ सत्ता में आया जिसे डर्ग के नाम से जाना जाता था। 1970 के दशक के अंत के दौर में उसने एक हिंसक अबियान चलाया जिसे 'इथियोपियन रेड टेरर' नाम दिया गया था। इस दौरान करीब पांच लाख लोग मारे गए थे। 1991 में मेंजित्सू जिम्बाब्वे चला गया था। उसे 2006 में नरसंहार के लिए दोषी ठहराया गया था। फिलहाल वह जिम्बाब्वे में रह रहा है। 
यदि आपको वर्तमान परिदृश्य में बताए तो  विश्व के कुछ देशों में फिर से तानाशाही हुकूमत पनप रही है ।
जैसे 1 उत्तर कोरिया _ किम जोंग उन
       2 रुशिया _ वल्दीमीर पुतिन
       3 चाइना _ शी जिनपिंग
Etc



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